मित्रो बाखली पत्रिका सतत अग्रसर है ।बाखली का फेस बुक में पेज और ग्रुप गति पकड़ चूका है।ब्लॉग भी बाखली नाम से अस्तित्व में आ गया है।आपको बताते हुए हर्ष का अनुभव कर रहा हूँ हमारा संरक्षक मंडल और परामर्श मंडल,रेखांकन,छायांकन ,व आवरण सज्जा हेतु वरिष्ठ और विशेषज्ञों की टीम की खोज पूर्ण हो गयी है ।सभी वरिष्ठ जनों का आभार जिन्होंने बाखली को आगे बढ़ाने हेतु सहर्ष प्रस्ताव स्वीकार किया है अपना आशीर्वाद दिया है ।नाम बाद में आपके सामने लाऊंगा अभी कुछ काम अधूरे हैं अभी प्रदेशों व महानगरों के प्रभारी व कुछ हिंदी प्रेमी देशों में भी प्रभारी बनाने की योजना पर कार्य चल रहा है जैसे नेपाल ,मॉरीशस आदि ।मेरी मित्र सूचि में अगर कोई ऐसे मित्र हों जो साहित्य की लोकतान्त्रिक धारा में विश्वास करते हों साहित्य की संस्कृति की किसी विधा से जुड़े हों ,और निस्वार्थ पत्रिका से जुड़ना चाहते हों मुझसे इन बॉक्स में अपना संछिप्त परिचय देकर हमसे जुड़ सकते हैं ।इसके बाद अगला दौर रचना मांगने का होगा जल्द आपके सामने पत्रिका का मूल्य ,सदस्यता ,और ईमेल एड्रेस ।आदि आप सबके सामने लाऊंगा।बस आपका स्नेह बना रहे।
डॉ गिरीश चंद्र पाण्डेय (प्रतीक)
पिथौरागढ़ उत्तराखंड