मैँ ना सही
वो ना सही
तुम ना सही
दिल ना सही
दिमाग ना सही
तन ना सही
मन ना सही
भाषा ना सही
ये ये ये
ये लेखनी तो आजाद है
सोच ना सहीँ
भाव ना सही
ये ये ये
ये रक्त तो आजाद है
देश ना सही
वेश ना सही
सँस्कृति ना सही
प्रकृति तो आजाद है
हम आजादी क्योँ चाहते हैँ मनमानी के लिए शान से जीने के लिए या आन मान सम्मान के लिए या जीने के लिए कुछ पाने के लिए या असहाय को सताने के लिए गरीब को चिढाने के लिए आखिर क्योँ??े लिए या आन मान सम्मान के लिए या जीने के लिए कुछ पाने के लिए या असहाय को सताने के लिए गरीब को चिढाने के लिए आखिर क्योँ??
हम आजादी क्योँ चाहते हैँ
ReplyDeleteमनमानी के लिए
शान से जीने के लिए
या आन मान सम्मान के लिए
या
जीने के लिए
कुछ पाने के लिए
या
असहाय को सताने के लिए
गरीब को
चिढाने के लिए
आखिर क्योँ??े लिए
या आन मान सम्मान के लिए
या
जीने के लिए
कुछ पाने के लिए
या
असहाय को सताने के लिए
गरीब को
चिढाने के लिए
आखिर क्योँ??