Friday, 16 January 2015

गजल

●●●●●●खुद की सोच●●●●●●●●

मौसम के रुख को बदलने की मत सोच
बेहतर होगा, उसमें खुद को ढालने की सोच

फ़िजूल की बातों से, कुछ मिलेगा नहीं
जीने के लिए कुछ पुख्ता करने की तो सोच

बुरे दौर से हर कोई दो चार होता ही है
जो गया सो गया आने वाले वक्त की तो सोच

मत खींच टांग किसी की ,वक्त जाया होगा
पहले अपने मकां को ,घर बनाने की तो सोच

कोई बिचार बुरा, आखिर आये ही क्यों भला
प्रतीक प्रयास कर अच्छा और सच्चा ही सोच

डॉ गिरीश चंद्र पाण्डेय(प्रतीक)
बगोटी,चम्पावत,उत्तराखंड
सम्प्रति-कार्यरत पिथोरागढ़ उत्तराखंड
©प्रतीक©
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