●●●√√√√√√√जाने के बाद√√√√●●●●●
जिक्र आया उसका उसकी मौत के मातम पर
नाम आया उसका उसकी मौत के मातम पर
हर कोई ढूँढ रहा था उसे,उसके हर सामान में
सामान बोल रहा था उसकी मौत के मातम पर
कद्र नहीं की अपनों ने भी जिन्दा था वो जब तक
आज चीख रहे थे अपने भी उसकी मौत के मातम पर
माँगता रहा दो रोटी वो न पसीजा दिल उनका
आज बाँट रहे पूडी पकौड़ी उसकी मौत के मातम पर
तरस गया था तड़फ गया था जीने के खातिर
प्रतीक जीने का सामान जुड़ा है उसकी मौत के मातम पर
डॉ गिरिश पाण्डेय प्रतीक
पिथोरागढ़ उत्तराखंड
Meree daayaree ke panne se
01:23pm//03//1//14
©gcp©
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