©कायर हो तुम©
ये इंजेक्शन
दवाइयाँ
आपरेशन
और भी न जाने क्या क्या
और इससे चूक गयी
तो फिर
अबोर्शन
कसम खाई है क्या
मुझे खोकला करने की
पहले नोचा
फिर सोचा
और कोख की
दुश्मन बन चुकी
अल्ट्रासाउंड मशीन डायन
अन्ततो मुझे ही कोसा
काया की माया
पहले खूब लुटाया
प्यार,दुलार ,पुचकार
आज फैला क्यों
ये दिलों में अन्धकार
कहाँ गया
स्नेहिल दुलार
सारे के सारे
त्यागपत्र मुझे ही क्यों देने पड़ते हैं
जिस गुनाह की
गुनाहगार मैं नहीं
उसकी सजा मुझे ही क्यों
और मुझे तो
जमानत भी नहीं देता कोई
चस्मदीद भी मुकर जाता है
मेरे वजूद से ऐसा क्या
खतरा है
जो मुझे मिटाना चाहते हो
गर्भ में ही
अरे इतना भी मत डरो कायर
"प्रतीक"डॉ गिरीश
पिथौरागढ़ उत्तराखंड
©gcp
No comments:
Post a Comment