Friday, 29 May 2015

गज़ल

झूठ पर झूठ बोलकर,झूठ को सह दिया न करो
हर जगह झूठ के किस्से,अपने कह दिया न करो

लूटकर चल दिये हमको, पलटकर देख भी लो तुम
किसी की बेरुखी को तुम,यों ही सह लिया न करो

खबर थी आशियाने में लगी है आग उसके भी
हर जगह बिन बुलाये ही ,यों ही चल दिया न करो

शहर में आज कोई भी सच को सुन नहीं सकता
गुस्ताखियों को अपनी, यों ही बल दिया न करो

बात को मत बना इतना बतंगड़ बन गए हो तुम
जिन्दगी आज की है ये ,प्रतीक कल जिया न करो

ड़ॉ गिरीश चंद्र पाण्डेय 【प्रतीक】
पिथौरागढ़ उत्तराखंड
11:49am//30//05//2015
©gcp©

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