सभी मित्रों को आने वाले वर्ष 2015 की शुभकामनाएं
●●●●क्या खोया क्या पाया●●●●
जहाँ शुरू हुई थी गोया वहीँ पूरी होगी
जिन्दगी कभी मेरी, कभी उसकी होगी
रोया था जब आया था तू इस जमी पर
जायेगा जब सबके आंखों में नमी होगी
फूल बरसेंगे तेरे कामों के लिए हरदम ही
तेरे जाने के बाद ये तेरी भी महक होगी
कभी रोया होगा तो कभी हँसा भी होगा
जिनके लिए रोया,उनके होठों में हंसी होगी
हमेशा जिन्दगी एक सी होती नहीं यहाँ
कभी धूप तो जिन्दगी, कभी छाया होगी
खट्टी मीठी यादें ही जीने का जरिया हैं
जिन्दगी कभी ख्वाब ,कभी हकीकत होगी
बीत गए वर्षों जैसे ये साल भी जा रहा है
पकड़ ले रास्ता प्रतीक,मंजिल भी तेरी होगी
डॉ गिरीश चंद्र पाण्डेय प्रतीक
पिथोरागढ़ उत्तराखंड
04:18pm//29//12//14/सोमबार
©prateek©
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