Friday, 12 December 2014

चीखता चित्र

●चीखता चित्र ●

कुछ चित्र मजबूर कर देते हैं
सोचने को
विवश कर देते हैं
कलम थामने को
भाव उद्वेलित हो जाते है
एक पीड़ा जो
एक टीस
एक दर्द भरी आह मजबूर है
फूट फूट कर रोने को
जज्बात पिघल जाते हैं
पत्थर दिलों के भी
अगर एसा है तो
ये बुढ़ापा ऐसे क्यों पड़ा है
सड़क किनारे
पिस जाने को
कहाँ गए प्रेम के गीत
कहाँ हैं आज वो गुलाब की पंखुड़ियाँ
क्या वो एक मात्र जरिया थे
देह को पाने को
कहाँ हैं वो लाडले
जिनकी नहीं होती थी रात
नहीं होता था दिन
इस माँ के बिना
जीने की तम्मना किसको नहीं होती भला
सलाम है इस जज्बे को
जो इस जीवन को बनाये रखने के लिए
लगाये हुए है जी जान
कौन देगा रोटी
कौन देगा कपड़ा
है कोई फ़रिश्ता इस चित्र को
बदलने की क्षमता रखने वाला
ये तो एक बानगी है
हिंदुस्तान ही नहीं
विश्व के हर कोने में
मिल जायेंगी ऐसी जिन्दी लाशें
जिन्हें जिन्दा रहते पहनने को लत्ता नहीं
खाने को रोटी नहीं
मरने के बाद के कफन का एक हिस्सा
जिन्दा रहते मिल जाता तो
चिता की तपिस का क्या करना
एक लकड़ी मिल जाती सहारे के लिए
कुछ जलाने के लिए
कुछ पकाने के लिए
पेट में तो अब आग रही नहीं
देह की आग तो अब जलने से रही
रिश्ते जो ढूंढते हैं
वो मुझमें बचा नहीं
ना चमड़ी ना दमड़ी
कुछ बचा नहीं, नोचने को
खसोटने को
बस बचा है तो
ये खोकला हड्डियों का ढांचा
जिसे कोई ढोना नहीं चाहता
न रिश्ते न भाव न प्रेम न वासना
सब के लिए हो चूका यह देह निरर्थक
बस सार्थक है आज ,मेरी मजबूरी
जो मुझे जिन्दा रहने के लिए
उर्जा दे रही है

डॉ गिरीश चंद्र पाण्डेय प्रतीक
पिथोरागढ़ उत्तराखंड
08:25am/13/12/14
©प्रतीक©




2 comments:

  1. "मरने के बाद के कफन का एक हिस्सा
    जिन्दा रहते मिल जाता तो
    चिता की तपिस का क्या करना
    एक लकड़ी मिल जाती सहारे के लिए
    कुछ जलाने के लिए
    कुछ पकाने के लिए
    पेट में तो अब आग रही नहीं
    देह की आग तो अब जलने से रही
    रिश्ते जो ढूंढते हैं
    वो मुझमें बचा नहीं
    ना चमड़ी ना दमड़ी
    कुछ बचा नहीं, नोचने को
    खसोटने को
    बस बचा है तो
    ये खोकला हड्डियों का ढांचा
    जिसे कोई ढोना नहीं चाहता
    न रिश्ते न भाव न प्रेम न वासना
    सब के लिए हो चूका यह देह निरर्थक
    बस सार्थक है आज ,मेरी मजबूरी
    जो मुझे जिन्दा रहने के लिए
    उर्जा दे रही है"...MN KO GAHRE TK VICHLIT KR JATI H AAPKI RACHNA ...AAJ KE HALATO PR KARARA PRAHAR...SUNDER LEKHAN K LIYE BADHAI AAPKO

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